भगवद् गीता वर्ल्ड

पवित्र धाम

मथुरा, वृंदावन से द्वारका और पुरी तक — श्रीकृष्ण के पवित्र तीर्थ।

  • मथुरा – यमुना तट पर बसी वह पावन नगरी जहाँ कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ।
  • वृंदावन – ब्रज की वह लीलाभूमि जहाँ श्रीकृष्ण ने गोचारण किया, वंशी बजाई और राधा रानी व गोपियों संग रास रचाया।
  • गोकुल – नंद बाबा और यशोदा मैया का गाँव, जहाँ बालकृष्ण का लालन-पालन हुआ और उनकी माखन-चोरी की लीलाएँ हुईं।
  • बरसाना – श्री राधा रानी का गाँव, जहाँ भानुगढ़ पहाड़ी पर लाडली जी का मंदिर है और लठमार होली खेली जाती है।
  • गोवर्धन – गिरिराज गोवर्धन, जिसे श्रीकृष्ण ने इंद्र की वर्षा से ब्रजवासियों की रक्षा हेतु अपनी उँगली पर उठाया था।
  • द्वारका – पश्चिमी समुद्र तट पर श्रीकृष्ण की राजधानी, जहाँ जगत मंदिर में द्वारकाधीश विराजते हैं; चार धामों में से एक।
  • कुरुक्षेत्र – ज्योतिसर – धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र, जहाँ ज्योतिसर में वटवृक्ष के नीचे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया।
  • जगन्नाथ पुरी – ओडिशा के समुद्र तट पर चार धामों में से एक, जहाँ श्रीकृष्ण जगन्नाथ रूप में बलभद्र और सुभद्रा के साथ विराजते हैं।
  • उडुपी – कर्नाटक का श्रीकृष्ण मठ, जिसकी स्थापना श्री मध्वाचार्य ने की और जहाँ भक्त कनकदास के लिए भगवान ने मुख मोड़ा।
  • गुरुवायूर – केरल का प्रसिद्ध मंदिर, जहाँ चतुर्भुज श्रीकृष्ण गुरुवायूरप्पन के रूप में बाल-भाव से पूजे जाते हैं।
  • नाथद्वारा – राजस्थान में पुष्टिमार्ग का प्रधान पीठ, जहाँ गोवर्धनधारी श्रीनाथजी बाल-स्वरूप में विराजते हैं।
  • डाकोर – गुजरात का रणछोड़राय धाम, जहाँ भक्त बोडाणा के प्रेम से भगवान द्वारका से पधारे।
  • सोमनाथ – भालका तीर्थ – प्रभास क्षेत्र, जहाँ भालका तीर्थ पर जरा का बाण लगा और देहोत्सर्ग तीर्थ से श्रीकृष्ण अपने धाम पधारे।