भगवद् गीता वर्ल्ड

डाकोर

गुजरात का रणछोड़राय धाम, जहाँ भक्त बोडाणा के प्रेम से भगवान द्वारका से पधारे।

गुजरात के खेड़ा जिले में स्थित डाकोर भगवान रणछोड़राय का प्रसिद्ध धाम है। "रणछोड़" नाम श्रीकृष्ण की उस लीला की याद दिलाता है जब उन्होंने प्रजा के हित में जरासंध और कालयवन के सामने युद्धभूमि छोड़कर द्वारका को अपनी राजधानी बनाया। गुजरात के भक्त उन्हें प्रेम से "राजा रणछोड़" कहते हैं।

लोक-प्रसिद्ध परंपरा के अनुसार डाकोर के भक्त बोडाणा जी वर्षों तक नियमित रूप से पैदल द्वारका जाकर भगवान के दर्शन करते थे। वृद्धावस्था में जब यात्रा कठिन हो गई, तो भगवान ने स्वयं उनसे बैलगाड़ी लाने को कहा और उनके साथ डाकोर पधारे। द्वारका के पुजारी जब पीछे-पीछे आए, तो भगवान गोमती तालाब में छिप गए। बोडाणा जी ने भगवान के लिए अपने प्राण दे दिए। पुजारियों ने विग्रह के बराबर सोना माँगा, पर बोडाणा जी की पत्नी गंगाबाई के पास केवल सोने की एक नथ (वाळी) थी। भगवान की कृपा से तराज़ू पर वह छोटी-सी नथ ही विग्रह के बराबर हो गई। यह कथा सिखाती है कि भगवान भक्त के प्रेम से तुलते हैं, धन से नहीं।

रणछोड़राय जी का वर्तमान मंदिर अठारहवीं शताब्दी में बना। पास ही गोमती तालाब है, जिसे इस कथा के कारण पवित्र माना जाता है। शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा के मेले यहाँ बहुत बड़े होते हैं, और फाल्गुन पूर्णिमा (होली) पर गुजरात भर से हज़ारों भक्त पैदल यात्रा करके दर्शन करने आते हैं। जन्माष्टमी भी यहाँ बड़े उल्लास से मनाई जाती है।

व्यावहारिक जानकारी: डाकोर का अपना रेलवे स्टेशन है, जो आणंद–गोधरा मार्ग पर है। निकटतम बड़े शहर नडियाद और आणंद हैं, और अहमदाबाद से भी सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

State
गुजरात
Nearest City
Nadiad
Main Temples
Ranchhodrai Temple, Gomti Lake
Associated Leela
The Lord coming from Dwarka for the devotee Bodana

इसी श्रेणी में और – पवित्र धाम