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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

आधी रात को मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का महापर्व, जिसे पूरा भारत उपवास, भजन और उत्सव के साथ मनाता है।

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का पावन दिन है। श्रीमद्भागवत के अनुसार अत्याचारी राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था, क्योंकि आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की आठवीं संतान उसका अंत करेगी। आधी रात को, रोहिणी नक्षत्र में, भगवान ने चतुर्भुज रूप में दर्शन दिए और फिर शिशु बन गए। भगवान की प्रेरणा से कारागार के द्वार खुल गए, पहरेदार सो गए, और वसुदेव जी उफनती यमुना पार करके बालक को गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मैया के घर छोड़ आए।

यह पर्व भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है (गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही तिथि श्रावण कृष्ण अष्टमी कहलाती है)। अंग्रेज़ी कैलेंडर में यह प्रायः अगस्त या सितंबर में आती है। कई स्थानों पर स्मार्त और वैष्णव परंपराएँ अलग-अलग दिन भी उत्सव मनाती हैं।

भक्त दिनभर उपवास रखते हैं, मंदिरों और घरों में झाँकियाँ सजाई जाती हैं और लड्डू गोपाल को झूले में झुलाया जाता है। ठीक मध्यरात्रि को शंख, घंटे और "नंद के आनंद भयो" जैसे जयघोष के बीच जन्म का उत्सव होता है, भगवान का पंचामृत से अभिषेक होता है और फिर व्रत खोला जाता है। मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर, वृंदावन के मंदिर, द्वारका का द्वारकाधीश मंदिर और डाकोर का रणछोड़राय मंदिर इस दिन भक्तों से भर जाते हैं।

महाराष्ट्र में अगले दिन "दही हांडी" या गोपालकाला का उत्सव होता है, जिसमें युवक मानव पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर टँगी दही की मटकी फोड़ते हैं, जो बाल कृष्ण की माखन-चोरी लीला की याद दिलाता है। ब्रज और गुजरात में अगले दिन "नंद उत्सव" मनाया जाता है, जब नंद बाबा के घर पुत्र-जन्म की खुशी में दही, हल्दी और मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं और बधाई गाई जाती है।

Tithi
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अमांत पंचांग में श्रावण कृष्ण अष्टमी)
Month
August–September
Places
Mathura, Vrindavan, Gokul, Dwarka, Dakor, Mumbai

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