द्वारका
पश्चिमी समुद्र तट पर श्रीकृष्ण की राजधानी, जहाँ जगत मंदिर में द्वारकाधीश विराजते हैं; चार धामों में से एक।
मथुरा पर जरासंध के बार-बार आक्रमणों से प्रजा की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने पश्चिमी समुद्र तट पर द्वारका नगरी बसाई और यादवों को वहाँ ले आए। यहीं वे राजा के रूप में द्वारकाधीश कहलाए, रुक्मिणी जी से विवाह किया और अपने बाल-सखा सुदामा का प्रेमपूर्वक स्वागत किया। भागवत और महाभारत के अनुसार श्रीकृष्ण के धाम-गमन के बाद यह नगरी समुद्र में समा गई। द्वारका चार धामों में से एक और सप्तपुरियों में भी गिनी जाती है।
गोमती नदी के समुद्र-संगम के पास स्थित द्वारकाधीश मंदिर, जिसे जगत मंदिर भी कहते हैं, कई मंजिलों वाला भव्य मंदिर है। इसके शिखर की ध्वजा दिन में कई बार बदली जाती है और भक्त ध्वजा चढ़ाने को बड़ा सौभाग्य मानते हैं। मंदिर से सीढ़ियाँ उतरकर गोमती घाट पहुँचते हैं, जहाँ स्नान करके दर्शन की परंपरा है। मंदिर परिसर के पास आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित पश्चिम की आम्नाय पीठ, द्वारका शारदा पीठ है। नगर से कुछ दूरी पर रुक्मिणी देवी का मंदिर है; लोक-परंपरा के अनुसार दुर्वासा ऋषि के प्रसंग के कारण यह मुख्य मंदिर से अलग है। ओखा के पास समुद्र में स्थित बेट द्वारका को श्रीकृष्ण का निवास-स्थान माना जाता है; यहाँ नाव से और अब सुदर्शन सेतु पुल से भी पहुँचा जा सकता है।
जन्माष्टमी यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव है। होली के अवसर पर फूलडोल उत्सव और दीपावली के बाद अन्नकूट भी बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं।
व्यावहारिक जानकारी: द्वारका गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में है और यहाँ का अपना रेलवे स्टेशन है। जामनगर लगभग 130 किमी दूर निकटतम बड़ा शहर और प्रमुख हवाई अड्डा है। पास ही नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी किए जा सकते हैं।
- State
- गुजरात
- Nearest City
- Jamnagar
- Main Temples
- Dwarkadhish Temple (Jagat Mandir), Gomti Ghat, Rukmini Devi Temple, Bet Dwarka, Dwarka Sharada Peetham
- Associated Leela
- Krishna's royal capital as Dwarkadhish