भगवद् गीता वर्ल्ड

गुरुवायूर

केरल का प्रसिद्ध मंदिर, जहाँ चतुर्भुज श्रीकृष्ण गुरुवायूरप्पन के रूप में बाल-भाव से पूजे जाते हैं।

केरल के त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवायूर मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्रिय कृष्ण-तीर्थों में से एक है। यहाँ के विग्रह को गुरुवायूरप्पन कहते हैं। यह चतुर्भुज रूप है, जिसमें भगवान शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए हैं, फिर भी भक्त उन्हें प्रेम से नन्हे कृष्ण, "उण्णिकण्णन", के भाव में पूजते हैं। परंपरा के अनुसार यही वह रूप है जिसमें भगवान ने जन्म के समय वसुदेव जी और देवकी जी को दर्शन दिए थे।

मंदिर की कथा के अनुसार यह विग्रह द्वारका में पूजित था। द्वारका के समुद्र में डूबने से पहले श्रीकृष्ण की इच्छा से देवगुरु बृहस्पति और वायुदेव इसे लेकर आए और भगवान शिव के मार्गदर्शन में यहाँ प्रतिष्ठित किया। गुरु और वायु द्वारा स्थापित होने के कारण यह स्थान गुरुवायूर कहलाया।

सोलहवीं शताब्दी में भक्त-कवि मेलपत्तूर नारायण भट्टतिरि ने यहीं श्रीमद्भागवत का सार संस्कृत काव्य "नारायणीयम्" में रचा। परंपरा कहती है कि इसकी रचना के साथ उनका कठिन रोग दूर हो गया। यहाँ प्रस्तुत होने वाला कृष्णनाट्टम् नृत्य-नाट्य श्रीकृष्ण की लीलाओं को भेंट के रूप में दर्शाता है। मंदिर में शिशुओं का प्रथम अन्नप्राशन (चोरूण), विवाह और तुलाभारम् जैसी सेवाएँ भी होती हैं। मंदिर के हाथी, जो पुन्नत्तूर कोट्टा में रहते हैं, भी प्रसिद्ध हैं।

यहाँ परिधान का कठोर नियम है: पुरुष पारंपरिक मुंडु पहनते हैं और ऊपरी वस्त्र उतारकर प्रवेश करते हैं, तथा महिलाएँ साड़ी या पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं। गुरुवायूर एकादशी, वार्षिक उत्सवम्, अष्टमी रोहिणी (जन्माष्टमी) और विषु यहाँ के प्रमुख पर्व हैं।

व्यावहारिक जानकारी: गुरुवायूर का अपना रेलवे स्टेशन है और निकटतम बड़ा शहर त्रिशूर है।

State
केरल
Nearest City
Thrissur
Main Temples
Guruvayur Shri Krishna Temple, Punnathur Kotta
Associated Leela
Four-armed form shown at Krishna's birth, installed by Guru and Vayu

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