भगवद् गीता वर्ल्ड

जगन्नाथ पुरी

ओडिशा के समुद्र तट पर चार धामों में से एक, जहाँ श्रीकृष्ण जगन्नाथ रूप में बलभद्र और सुभद्रा के साथ विराजते हैं।

ओडिशा के पूर्वी समुद्र तट पर स्थित जगन्नाथ पुरी चार धामों में से एक है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण "जगत के नाथ" जगन्नाथ के रूप में अपने बड़े भाई बलभद्र जी, बहन सुभद्रा जी और सुदर्शन के साथ पूजे जाते हैं। लोक-प्रसिद्ध परंपरा के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न को स्वप्न में प्रेरणा मिली और समुद्र में आई पवित्र दारु (लकड़ी) से विग्रह बनवाए गए। वृद्ध शिल्पी के रूप में आए विश्वकर्मा ने जिस अनूठे रूप में विग्रह छोड़े, बड़े गोल नेत्रों वाला वही रूप आज भी पूजित है। ये विग्रह नीम की लकड़ी से बने होते हैं और समय-समय पर दुर्लभ नवकलेवर अनुष्ठान में इनका नवीनीकरण होता है।

ऊँचे शिखर पर नील चक्र और ध्वजा वाला श्री जगन्नाथ मंदिर दूर से ही भक्तों को आकर्षित करता है। यहाँ का महाप्रसाद अत्यंत प्रसिद्ध है: मंदिर की विशाल रसोई में मिट्टी के बर्तनों में लकड़ी की आँच पर भोग बनता है, जो भगवान जगन्नाथ और देवी विमला को अर्पित होने के बाद महाप्रसाद बनता है। आनंद बाज़ार में सभी भक्त बिना किसी भेदभाव के इसे साथ बैठकर ग्रहण करते हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने जीवन के अनेक वर्ष पुरी में बिताए, और आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित पूर्व की आम्नाय पीठ, गोवर्धन मठ भी यहीं है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा की स्नान यात्रा के बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा निकलती है। तीनों विग्रह विशाल रथों पर विराजकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं और लाखों भक्त रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य मानते हैं। कुछ दिनों बाद बहुड़ा यात्रा में भगवान अपने मंदिर लौटते हैं।

व्यावहारिक जानकारी: पुरी का अपना रेलवे स्टेशन है। निकटतम बड़ा शहर और हवाई अड्डा भुवनेश्वर है, जो लगभग साठ किलोमीटर दूर है।

State
ओडिशा
Nearest City
Bhubaneswar
Main Temples
Shri Jagannath Temple, Gundicha Temple, Govardhan Matha
Associated Leela
Krishna as Jagannath with Balabhadra and Subhadra

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