भगवद् गीता वर्ल्ड

गुजरात में श्रीकृष्ण

द्वारका से डाकोर, शामळाजी और माधवपुर तक — गुजरात की कृष्ण-भक्ति, तीर्थ, संत और परंपराएँ।

  • श्रीकृष्ण और गुजरात – द्वारका से डाकोर तक, नरसिंह मेहता से पुष्टिमार्ग तक – गुजरात की धरती और यहाँ का जीवन भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम में रचा-बसा है।
  • बेट द्वारका – ओखा के पास समुद्र में स्थित वह द्वीप, जिसे भक्त भगवान श्रीकृष्ण का निवास-स्थान मानते हैं और जहाँ अब सुदर्शन सेतु से पहुँचा जा सकता है।
  • शामलाजी – अरवल्ली की पहाड़ियों में मेश्वो नदी के तट पर श्याम वर्ण गदाधर भगवान का प्राचीन तीर्थ, जहाँ कार्तिक पूर्णिमा का बड़ा मेला लगता है।
  • माधवपुर घेड – पोरबंदर के पास समुद्र-तट पर बसा माधवपुर, जहाँ लोक-परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी का विवाह हुआ और हर चैत्र में विवाहोत्सव का मेला लगता है।
  • पोरबंदर – सुदामापुरी – लोक-परंपरा में श्रीकृष्ण के सखा सुदामा की नगरी मानी जाने वाली पोरबंदर, जहाँ सुदामा मंदिर है और जो महात्मा गांधी की जन्मभूमि भी है।
  • भक्त कवि नरसिंह मेहता – पंद्रहवीं शताब्दी के जूनागढ़ के भक्त कवि, गुजराती के आदि कवि, जिनकी प्रभातियाँ और "वैष्णव जन तो" आज भी हर गुजराती के हृदय में बसते हैं।
  • मीराबाई और द्वारका – गिरधर गोपाल की दीवानी मीराबाई ने परंपरा के अनुसार अपने अंतिम वर्ष द्वारका में बिताए और रणछोड़राय के विग्रह में समा गईं।
  • गुजरात में पुष्टिमार्ग – श्री वल्लभाचार्य जी का पुष्टिमार्ग गुजरात के वैष्णव परिवारों का जीवन है – हवेलियों में ठाकुर जी की आठ झाँकियों की सेवा, सामग्री और अष्टछाप कीर्तन।
  • गुजरात में जन्माष्टमी – रांधण छठ और शीतला सातम से लेकर आधी रात के जन्मोत्सव, नंद उत्सव, मटकी-फोड़ और लोक-मेलों तक – गुजरात में जन्माष्टमी कई दिनों का उत्सव है।
  • अहमदाबाद की रथयात्रा – आषाढ़ी बीज पर जमालपुर के जगदीश मंदिर से निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, जो भारत की सबसे बड़ी रथयात्राओं में से एक है।
  • द्वारका: ध्वजा, गोमती घाट और शारदा पीठ – जगत मंदिर के शिखर पर दिन में कई बार बदली जाने वाली ध्वजा, स्वर्ग द्वार से उतरती छप्पन सीढ़ियाँ, गोमती घाट और आदि शंकराचार्य की शारदा पीठ।