भगवद् गीता वर्ल्ड

गोवर्धन

गिरिराज गोवर्धन, जिसे श्रीकृष्ण ने इंद्र की वर्षा से ब्रजवासियों की रक्षा हेतु अपनी उँगली पर उठाया था।

श्रीमद्भागवत के अनुसार श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र-यज्ञ के स्थान पर गिरिराज गोवर्धन, गौओं और ब्राह्मणों की पूजा करने की प्रेरणा दी। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार वर्षा की, तब बालकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया और सात दिनों तक सारे ब्रज को उसकी छाया में सुरक्षित रखा। अंततः इंद्र का अभिमान टूटा। इसीलिए भक्त गोवर्धन को केवल पर्वत नहीं, स्वयं श्रीकृष्ण का स्वरूप मानकर "गिरिराज जी" कहते हैं।

गिरिराज की लगभग इक्कीस किलोमीटर की परिक्रमा यहाँ की सबसे बड़ी साधना है। भक्त इसे पैदल करते हैं, और कुछ श्रद्धालु दंडवत प्रणाम करते हुए भी परिक्रमा पूरी करते हैं। परिक्रमा मार्ग पर मानसी गंगा है, जिसके विषय में परंपरा है कि श्रीकृष्ण ने इसे अपने मन से प्रकट किया। राधा कुंड और श्याम कुंड अत्यंत पावन सरोवर हैं, जिनका संबंध अरिष्टासुर-वध की कथा से जोड़ा जाता है; बहुलाष्टमी की मध्यरात्रि में यहाँ स्नान का विशेष महत्व है। दानघाटी वह स्थान है जहाँ कृष्ण गोपियों से हँसी-हँसी में दूध-दही का "दान" माँगते थे; यहाँ गिरिराज जी का दुग्धाभिषेक होता है। जतीपुरा पुष्टिमार्ग का प्रमुख स्थल है, जहाँ गिरिराज जी के मुखारविंद के दर्शन होते हैं और जहाँ से श्रीनाथजी का प्राकट्य जुड़ा है।

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का उत्सव यहाँ सबसे बड़ा पर्व है। आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) पर मुड़िया पूनों का मेला लगता है, जब लाखों भक्त परिक्रमा करते हैं।

व्यावहारिक जानकारी: गोवर्धन मथुरा से लगभग बाईस किलोमीटर दूर है और निकटतम बड़ा रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है।

State
उत्तर प्रदेश
Nearest City
Mathura
Main Temples
Manasi Ganga, Radha Kund and Shyam Kund, Daan Ghati Temple, Mukharvind, Jatipura
Associated Leela
Lifting of Govardhan hill

इसी श्रेणी में और – पवित्र धाम