नाथद्वारा
राजस्थान में पुष्टिमार्ग का प्रधान पीठ, जहाँ गोवर्धनधारी श्रीनाथजी बाल-स्वरूप में विराजते हैं।
नाथद्वारा श्री वल्लभाचार्य जी द्वारा प्रवर्तित पुष्टिमार्ग का प्रधान तीर्थ है। यहाँ विराजमान श्रीनाथजी गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण का स्वरूप हैं, जिनका बायाँ हाथ गिरिराज को उठाने की मुद्रा में ऊपर उठा हुआ है। पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार यह स्वरूप ब्रज में गोवर्धन पर्वत पर प्रकट हुआ और श्री वल्लभाचार्य जी ने वहाँ इनकी सेवा आरंभ की।
सत्रहवीं शताब्दी में औरंगज़ेब के शासनकाल में मूर्तियों पर संकट के समय श्रीनाथजी के स्वरूप की रक्षा के लिए उन्हें ब्रज से बाहर ले जाया गया। कई स्थानों से होते हुए जब रथ मेवाड़ पहुँचा, तो सिंहाड़ गाँव में उसका पहिया कीचड़ में धँस गया और आगे नहीं बढ़ा। इसे श्रीनाथजी की इच्छा मानकर, मेवाड़ के महाराणा राज सिंह के संरक्षण में, वहीं उनकी सेवा स्थापित की गई और यह स्थान "नाथद्वारा", अर्थात् श्रीनाथजी का द्वार, कहलाया।
यहाँ का मंदिर "हवेली" कहलाता है, क्योंकि श्रीनाथजी की सेवा घर के लाड़ले बालक की तरह होती है। दिन भर में मंगला, शृंगार, ग्वाल, राजभोग, उत्थापन, भोग, संध्या आरती और शयन जैसे अनेक दर्शन खुलते हैं। श्रीनाथजी के पीछे लगाए जाने वाले चित्रित वस्त्र "पिछवाई" कहलाते हैं, जो ऋतु और उत्सव के अनुसार बदले जाते हैं; नाथद्वारा की पिछवाई चित्रकला विश्वप्रसिद्ध है। जन्माष्टमी, नंद महोत्सव, दीपावली, अन्नकूट और होली यहाँ के प्रमुख उत्सव हैं, और अन्नकूट का भव्य दर्शन विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
व्यावहारिक जानकारी: नाथद्वारा राजस्थान के राजसमंद जिले में है। निकटतम बड़ा शहर उदयपुर है, जहाँ हवाई अड्डा और प्रमुख रेलवे स्टेशन है। गुजरात के वैष्णव भक्तों के लिए यह अत्यंत प्रिय तीर्थ है।
- State
- राजस्थान
- Nearest City
- Udaipur
- Main Temples
- Shrinathji Haveli
- Associated Leela
- Shrinathji, Krishna as the lifter of Govardhan