भगवद् गीता वर्ल्ड

गोकुल

नंद बाबा और यशोदा मैया का गाँव, जहाँ बालकृष्ण का लालन-पालन हुआ और उनकी माखन-चोरी की लीलाएँ हुईं।

गोकुल वह गाँव है जहाँ जन्म की रात वसुदेव जी उफनती यमुना पार करके नवजात कृष्ण को नंद बाबा के घर छोड़ आए थे। यहीं यशोदा मैया ने अपने लाला का लालन-पालन किया। श्रीमद्भागवत में वर्णित पूतना-उद्धार, तृणावर्त-वध, माखन-चोरी और ऊखल से बँधने की दामोदर लीला जैसी अनेक बाल-लीलाएँ गोकुल-महावन क्षेत्र से जुड़ी हैं। जब कंस के भेजे असुरों के उपद्रव बढ़े, तब नंद बाबा पूरे गोकुल को लेकर वृंदावन चले गए।

यमुना पार स्थित महावन को पुराना गोकुल कहा जाता है। यहाँ का नंद भवन, जिसे चौरासी खंभा भी कहते हैं, नंद बाबा के निवास का स्मरण कराता है। निकट ही ब्रह्मांड घाट है, जहाँ परंपरा के अनुसार मिट्टी खाने पर यशोदा मैया ने बालकृष्ण के मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन किए। रमण रेती वह कोमल रेत का क्षेत्र है जहाँ कृष्ण और बलराम खेला करते थे; भक्त श्रद्धा से इस रेत में लोटते हैं।

गोकुल पुष्टिमार्ग का भी अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। यमुना तट का ठकुरानी घाट वल्लभ संप्रदाय की परंपरा में श्री वल्लभाचार्य जी और श्री यमुना महारानी से जुड़ा हुआ पावन स्थान माना जाता है, और आगे चलकर उनके पुत्र श्री गुसाईं जी (विट्ठलनाथ जी) ने भी यहाँ निवास किया।

जन्माष्टमी के अगले दिन का नंदोत्सव यहाँ बड़े आनंद से मनाया जाता है, जब बधाई गाई जाती है और दूध-दही लुटाया जाता है। होली के समय गोकुल की छड़ीमार होली भी प्रसिद्ध है।

व्यावहारिक जानकारी: गोकुल मथुरा से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर यमुना के दूसरे तट पर है। निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है।

State
उत्तर प्रदेश
Nearest City
Mathura
Main Temples
Nand Bhavan (Chaurasi Khamba), Mahavan, Brahmand Ghat, Raman Reti, Thakurani Ghat
Associated Leela
Krishna's infancy with Nanda and Yashoda

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