उत्सव और पर्व
श्रीकृष्ण से जुड़े प्रमुख त्योहार — उनका महत्व और मनाने की परंपरा।
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी – आधी रात को मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का महापर्व, जिसे पूरा भारत उपवास, भजन और उत्सव के साथ मनाता है।
- राधा अष्टमी – श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति श्रीराधा रानी के प्राकट्य का उत्सव, जो जन्माष्टमी के पंद्रह दिन बाद बरसाना में विशेष धूमधाम से मनाया जाता है।
- झूलन यात्रा (हिंडोला उत्सव) – सावन की हरियाली में श्रीराधा-कृष्ण को सजे हुए झूलों पर झुलाने का मधुर उत्सव, जो वृंदावन और गुजरात की पुष्टिमार्गीय हवेलियों में विशेष रूप से मनाया जाता है।
- शरद पूर्णिमा (रास पूर्णिमा) – शरद ऋतु की पूर्ण चाँदनी रात, जब भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था।
- गोवर्धन पूजा और अन्नकूट – दीपावली के अगले दिन, उस लीला की स्मृति जब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर व्रजवासियों की रक्षा की थी; भगवान को अन्न का पर्वत अर्पित किया जाता है।
- गीता जयंती – वह पावन दिन जब कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
- ब्रज की होली – बरसाना की लट्ठमार होली से लेकर वृंदावन की फूलों की होली और दाऊजी के हुरंगे तक, ब्रजभूमि में रंगों का वह उत्सव जो श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम में रँगा है।
- जगन्नाथ रथ यात्रा – पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विशाल रथों पर निकलने वाली यात्रा, जब स्वयं भगवान भक्तों को दर्शन देने मंदिर से बाहर आते हैं।
- कार्तिक मास (दामोदर मास) – भगवान दामोदर को समर्पित पवित्र मास, जिसमें दीपदान, दामोदराष्टक का पाठ और अंत में तुलसी विवाह होता है।