भगवद् गीता वर्ल्ड

उडुपी

कर्नाटक का श्रीकृष्ण मठ, जिसकी स्थापना श्री मध्वाचार्य ने की और जहाँ भक्त कनकदास के लिए भगवान ने मुख मोड़ा।

कर्नाटक के तटीय नगर उडुपी में स्थित श्रीकृष्ण मठ की स्थापना द्वैत वेदांत के आचार्य श्री मध्वाचार्य ने तेरहवीं शताब्दी में की थी। लोक-प्रसिद्ध परंपरा के अनुसार समुद्र में तूफ़ान में फँसे एक जहाज़ को मध्वाचार्य जी की कृपा से सुरक्षित तट मिला। कृतज्ञ नाविकों ने उन्हें गोपीचंदन का एक खंड भेंट किया, जिसके भीतर हाथ में मथानी और रस्सी लिए बालकृष्ण का सुंदर विग्रह था। आचार्य ने उसी विग्रह को उडुपी में प्रतिष्ठित किया।

यहाँ की सबसे मार्मिक कथा भक्त-कवि कनकदास जी की है। परंपरा के अनुसार उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं मिला, तो वे पीछे की ओर खड़े होकर प्रेम से भगवान का भजन गाने लगे। तब दीवार में दरार पड़ गई और श्रीकृष्ण का विग्रह घूमकर उनकी ओर मुख करके खड़ा हो गया। वह खिड़की आज "कनकन किंडी" कहलाती है और तभी से भगवान पश्चिम की ओर मुख किए हुए हैं। भक्त नौ छिद्रों वाली नवग्रह खिड़की से दर्शन करते हैं। यह कथा बताती है कि भगवान केवल भक्ति देखते हैं, जाति या पद नहीं।

श्री मध्वाचार्य ने अपने आठ शिष्यों के लिए आठ मठ स्थापित किए, जिन्हें अष्ट मठ कहते हैं। इन मठों के स्वामी बारी-बारी से दो-दो वर्ष तक श्रीकृष्ण की पूजा का दायित्व संभालते हैं; इस व्यवस्था को पर्याय कहते हैं और दायित्व-हस्तांतरण का पर्याय उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, मकर संक्रांति पर रथोत्सव और मध्व नवमी यहाँ के प्रमुख पर्व हैं।

व्यावहारिक जानकारी: उडुपी कोंकण रेलवे मार्ग पर स्थित है और यहाँ का अपना रेलवे स्टेशन है। निकटतम बड़ा शहर और हवाई अड्डा मंगलुरु है। मठ में दिया जाने वाला अन्न-प्रसाद भी उडुपी की पहचान है।

State
कर्नाटक
Nearest City
Mangaluru
Main Temples
Shri Krishna Matha, Kanakana Kindi, Ashta Mathas
Associated Leela
Child Krishna with churning rod; the Lord turning for Kanakadasa

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