भगवद् गीता वर्ल्ड

गुजरात में जन्माष्टमी

रांधण छठ और शीतला सातम से लेकर आधी रात के जन्मोत्सव, नंद उत्सव, मटकी-फोड़ और लोक-मेलों तक – गुजरात में जन्माष्टमी कई दिनों का उत्सव है।

गुजराती पंचांग में जन्माष्टमी श्रावण कृष्ण अष्टमी को आती है (उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यही भाद्रपद कृष्ण अष्टमी कहलाती है)। गुजरात, विशेषकर सौराष्ट्र में, यह केवल एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि "सातम-आठम" के नाम से कई दिनों का उत्सव है, जब दफ़्तरों और स्कूलों में छुट्टियाँ होती हैं और पूरा परिवार साथ मिलकर त्योहार मनाता है।

इसकी शुरुआत रांधण छठ से होती है, जब घरों में महिलाएँ अगले दिन के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाती हैं। अगले दिन शीतला सातम पर चूल्हा नहीं जलाया जाता; परिवार के स्वास्थ्य के लिए शीतला माता की पूजा की जाती है और पिछले दिन का बना ठंडा भोजन खाया जाता है। फिर आती है आठम, जन्माष्टमी, जब भक्त व्रत रखते हैं, मंदिर और घर सजाए जाते हैं, और आधी रात को लाला के जन्म के साथ घंटे, शंख और "नंद घर आनंद भयो, जय कनैया लाल की" के जयघोष गूँज उठते हैं। अगला दिन नोम, यानी नंद उत्सव, बधाई और पारणे का दिन है। गाँवों और शहरों में युवाओं की टोलियाँ मानव पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर टँगी दही-माखन की मटकी फोड़ती हैं।

इन दिनों द्वारका और डाकोर में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। सौराष्ट्र में सातम-आठम के मेलों की पुरानी परंपरा है; राजकोट का लोक मेला इनमें सबसे बड़ा माना जाता है, जो कई दिनों तक चलता है और जिसमें लाखों लोग झूलों, लोक-संगीत और बाज़ारों का आनंद लेने आते हैं।

पुष्टिमार्गीय हवेलियों में जन्माष्टमी पर ठाकुर जी के विशेष शृंगार और पालना दर्शन होते हैं, जब बाल-कृष्ण को पालने में झुलाया जाता है। इससे पहले पूरे श्रावण मास में हिंडोला दर्शन होते हैं, जिनमें फूल, पत्तों, फलों और रंगीन वस्त्रों से सजे झूले मन मोह लेते हैं।

District
Gujarat (statewide)

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