पोरबंदर – सुदामापुरी
लोक-परंपरा में श्रीकृष्ण के सखा सुदामा की नगरी मानी जाने वाली पोरबंदर, जहाँ सुदामा मंदिर है और जो महात्मा गांधी की जन्मभूमि भी है।
सौराष्ट्र के समुद्र-तट पर बसी पोरबंदर नगरी को लोक-परंपरा में सुदामापुरी, अर्थात् श्रीकृष्ण के बाल-सखा सुदामा की नगरी, माना जाता है। श्रीमद्भागवत में इस निर्धन ब्राह्मण सखा की कथा बड़ी मार्मिक है। अत्यंत गरीबी में भी सुदामा संतोष और भक्ति से जीवन बिताते थे। पत्नी के आग्रह पर वे अपने पुराने मित्र से मिलने द्वारका गए और भेंट के रूप में केवल मुट्ठी भर चिउड़े (पौंआ) की पोटली ले गए। द्वारकाधीश ने दौड़कर उन्हें गले लगाया, अपने हाथों से उनके चरण धोए और उस साधारण भेंट को बड़े प्रेम से ग्रहण किया। सुदामा ने कुछ माँगा नहीं, पर जब वे घर लौटे तो उनकी झोंपड़ी के स्थान पर ऐश्वर्य से भरा भवन था।
इस मित्रता की स्मृति में नगर के बीच सुदामा मंदिर स्थित है, जो भारत में सुदामा जी को समर्पित बहुत कम मंदिरों में से एक है। मंदिर के प्रांगण में भूलभुलैया जैसा एक छोटा-सा पथ है, जिसे लोग "लख चौरासी" कहते हैं; यात्री उसमें घूमकर चौरासी लाख योनियों के चक्र से मुक्ति की भावना करते हैं। यहाँ आकर भक्त सच्ची मित्रता, निःस्वार्थ प्रेम और संतोष का संदेश हृदय में ले जाते हैं।
पोरबंदर महात्मा गांधी की जन्मभूमि भी है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को यहीं हुआ था, और उनके पैतृक घर के पास बना कीर्ति मंदिर उनकी स्मृति को सँजोए हुए है। गांधी जी का परिवार वैष्णव था, उनकी माता पुतलीबाई बड़ी धर्मपरायण थीं, और नरसिंह मेहता का भजन "वैष्णव जन तो" गांधी जी को अत्यंत प्रिय था।
व्यावहारिक जानकारी: पोरबंदर रेल, सड़क और हवाई मार्ग से जुड़ा है। यह द्वारका और सोमनाथ के बीच के तटीय मार्ग पर है, इसलिए यात्री प्रायः द्वारका, पोरबंदर, माधवपुर और सोमनाथ को एक ही यात्रा में जोड़ लेते हैं।
- District
- Porbandar