शामलाजी
अरवल्ली की पहाड़ियों में मेश्वो नदी के तट पर श्याम वर्ण गदाधर भगवान का प्राचीन तीर्थ, जहाँ कार्तिक पूर्णिमा का बड़ा मेला लगता है।
शामलाजी उत्तर-पूर्वी गुजरात के अरवल्ली जिले में, राजस्थान की सीमा के निकट, मेश्वो नदी के तट पर हरी-भरी छोटी पहाड़ियों के बीच स्थित है। यहाँ के आराध्य भगवान विष्णु के श्याम वर्ण स्वरूप हैं, जिनकी उपासना श्रीकृष्ण के रूप में होती है। उन्हें गदाधर, अर्थात् गदा धारण करने वाले, कहा जाता है और प्रेम से शामलाजी पुकारा जाता है। गुजराती में "शामलो" या "शामलिया" श्रीकृष्ण के साँवले रंग के लिए एक बहुत कोमल शब्द है, और यही भाव इस नाम में है। इस क्षेत्र के भील तथा अन्य आदिवासी समुदाय भी भगवान को बड़ी श्रद्धा से पूजते हैं और उन्हें अपनी बोली में "कालिया देव" भी कहते हैं।
मंदिर पत्थर से बना एक पुराना मंदिर है, जिसकी दीवारों पर बारीक नक्काशी और ऊँचा शिखर दर्शनीय हैं। इतिहासकारों के लिए भी शामलाजी का क्षेत्र महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ और आसपास प्राचीन मूर्तियाँ मिली हैं, जो बताती हैं कि यह स्थान अनेक शताब्दियों से पवित्र माना जाता रहा है। गुजरात के वैष्णव शामलाजी को राज्य के प्रमुख कृष्ण-तीर्थों में गिनते हैं।
यहाँ का सबसे बड़ा आयोजन कार्तिक पूर्णिमा के आसपास लगने वाला मेला है। इस अवसर पर गुजरात और राजस्थान से, विशेषकर आदिवासी अंचलों से, बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। वे मेश्वो नदी में स्नान करते हैं, भगवान के दर्शन करते हैं, और लोकगीतों, लोकनृत्यों तथा रंग-बिरंगे बाज़ारों से पूरा वातावरण उत्सवमय हो जाता है। जन्माष्टमी और अन्य वैष्णव पर्व भी यहाँ श्रद्धा से मनाए जाते हैं।
व्यावहारिक जानकारी: शामलाजी अहमदाबाद–उदयपुर राजमार्ग पर स्थित है। मोडासा और हिम्मतनगर निकट के प्रमुख नगर हैं, और अहमदाबाद से सड़क मार्ग द्वारा यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।
- District
- Aravalli