भगवद् गीता वर्ल्ड

माधवपुर घेड

पोरबंदर के पास समुद्र-तट पर बसा माधवपुर, जहाँ लोक-परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी का विवाह हुआ और हर चैत्र में विवाहोत्सव का मेला लगता है।

माधवपुर पोरबंदर जिले का एक तटीय गाँव है, जो पोरबंदर और वेरावल (सोमनाथ) के बीच के मार्ग पर, घेड कहलाने वाले क्षेत्र में स्थित है। श्रीमद्भागवत बताता है कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी जी ने श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर प्रार्थना की थी कि वे आकर उन्हें ले जाएँ, और भगवान ने उनका हरण कर उनसे विवाह किया। भागवत में विवाह का उत्सव द्वारका में मनाए जाने का वर्णन है, पर सौराष्ट्र की लोक-परंपरा विवाह-संस्कार को माधवपुर में मानती है। इसी विश्वास के कारण माधवपुर का नाम सुनते ही गुजरात के भक्तों के मन में "माधवराय का ब्याह" गूँज उठता है।

गाँव में माधवराय जी का मंदिर है, जहाँ श्रीकृष्ण माधवराय के रूप में विराजते हैं। यहाँ एक पुराना मंदिर और उसके पास नया मंदिर है, और समुद्र का सुंदर किनारा भी पास ही है। भक्त उन स्थानों के दर्शन करते हैं जिन्हें परंपरा विवाह से जोड़ती है।

हर वर्ष चैत्र शुक्ल नवमी (राम नवमी) के आसपास से कई दिनों तक माधवपुर का मेला लगता है, जिसमें भगवान के विवाह का उत्सव बड़े प्रेम से मनाया जाता है। माधवराय जी की बारात (वरघोड़ा) निकलती है, विवाह के लोकगीत गाए जाते हैं, और गाँव-गाँव से आए लोग स्वयं को बाराती मानकर इस आनंद में शामिल होते हैं। मेले में लोकनृत्य, भजन और ग्रामीण बाज़ार का रंग भी देखने लायक होता है।

हाल के वर्षों में इस मेले में अरुणाचल प्रदेश के साथ संबंध का भी उत्सव मनाया जाने लगा है, जो उस परंपरा से जुड़ा है जिसके अनुसार रुक्मिणी जी वहीं से आई थीं। पूर्वोत्तर के कलाकार और अतिथि गुजरात आकर इस विवाहोत्सव में भाग लेते हैं, और यह मेला देश के दो छोरों को जोड़ने वाला प्रेम-उत्सव बन गया है। ध्यान रहे कि यह संबंध परंपरा और लोक-विश्वास पर आधारित है।

District
Porbandar

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