भगवद् गीता वर्ल्ड

झूलन यात्रा (हिंडोला उत्सव)

सावन की हरियाली में श्रीराधा-कृष्ण को सजे हुए झूलों पर झुलाने का मधुर उत्सव, जो वृंदावन और गुजरात की पुष्टिमार्गीय हवेलियों में विशेष रूप से मनाया जाता है।

झूलन यात्रा वर्षा ऋतु का एक कोमल और आनंदमय उत्सव है। ब्रज की परंपरा में वर्णन आता है कि सावन में जब यमुना तट हरियाली से भर जाता था, बादल घिर आते थे और मोर नाचते थे, तब गोपियाँ कदंब के वृक्षों पर फूलों से सजे झूले डालकर श्रीराधा और श्रीकृष्ण को झुलाती थीं। इसी मधुर लीला की स्मृति में मंदिरों में भगवान के युगल स्वरूप को सुंदर झूलों पर विराजमान करके झुलाया जाता है। भक्तों के लिए स्वयं अपने हाथों से भगवान का झूला झुलाना बहुत सौभाग्य की बात मानी जाती है।

यह उत्सव श्रावण मास में मनाया जाता है, जो अंग्रेज़ी कैलेंडर में प्रायः जुलाई-अगस्त में पड़ता है। अनेक मंदिरों में, विशेषकर गौड़ीय और इस्कॉन परंपरा में, झूलन यात्रा श्रावण शुक्ल पक्ष में कुछ दिनों तक चलती है और श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) को पूर्ण होती है। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में हरियाली तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया) के दिन ठाकुर जी के सोने-चाँदी के भव्य हिंडोले के दर्शन बहुत प्रसिद्ध हैं।

झूलों को फूलों, पत्तों, रंगीन वस्त्रों, मोतियों और दीपों से सजाया जाता है। भक्त बारी-बारी से रेशमी डोरी खींचकर भगवान को झुलाते हैं और साथ में सावन के मल्हार और झूले के पद गाए जाते हैं। वृंदावन, मथुरा, बरसाना और नंदगाँव के मंदिरों में इन दिनों विशेष भीड़ रहती है।

गुजरात और राजस्थान की पुष्टिमार्गीय हवेलियों में यह उत्सव "हिंडोला" कहलाता है और लगभग पूरे एक महीने तक चलता है। हर दिन ठाकोरजी के लिए अलग प्रकार का हिंडोला सजाया जाता है, कभी फूलों का, कभी फलों का, कभी मेवों का, कभी काँच या चाँदी का, और वैष्णवजन श्रद्धा से हिंडोले के पद गाते हैं।

Tithi
श्रावण मास, विशेषकर श्रावण शुक्ल पक्ष से श्रावण पूर्णिमा तक
Month
July–August
Places
Vrindavan, Mathura, Barsana, Nandgaon, Nathdwara, Pushtimarg havelis of Gujarat

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