बेट द्वारका
ओखा के पास समुद्र में स्थित वह द्वीप, जिसे भक्त भगवान श्रीकृष्ण का निवास-स्थान मानते हैं और जहाँ अब सुदर्शन सेतु से पहुँचा जा सकता है।
बेट द्वारका कच्छ की खाड़ी में एक छोटा-सा द्वीप है, जो सौराष्ट्र के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित ओखा बंदरगाह से थोड़ी दूरी पर है। इसका प्राचीन नाम शंखोद्धार है, जो शंख से जुड़ा है; इस द्वीप के आसपास का समुद्र लंबे समय से शंखों के लिए प्रसिद्ध रहा है और परंपरा में यह नाम भगवान विष्णु के शंख से जोड़ा जाता है। भक्त बेट द्वारका को श्रीकृष्ण का निजी निवास-स्थान मानते हैं, जबकि मुख्य भूमि की द्वारका को उनके राजदरबार का स्थान। इसी कारण माना जाता है कि बेट के दर्शन किए बिना द्वारका की यात्रा अधूरी है।
यहाँ का मुख्य मंदिर बेट का द्वारकाधीश मंदिर है, जो एक अकेले मंदिर से अधिक एक महल जैसा है। इसके परिसर में श्रीकृष्ण के साथ-साथ उनकी पटरानियों और परिवार के मंदिर भी हैं, और यहाँ की सेवा घर जैसे वात्सल्य भाव से होती है। द्वीप पर हनुमान दांडी का मंदिर भी प्रसिद्ध है, जहाँ परंपरा के अनुसार हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज के साथ पूजे जाते हैं।
लोक-परंपरा के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण के निर्धन बाल-सखा सुदामा एक छोटी-सी पोटली में चावल (तंदुल) लेकर आए थे और भगवान ने उनका अपार प्रेम से स्वागत किया था। इस प्रसंग की स्मृति में बहुत-से यात्री यहाँ चावल अर्पित करते हैं।
पीढ़ियों तक यात्री ओखा की जेटी से नाव द्वारा द्वीप पर जाते रहे, और समुद्र की यह छोटी-सी यात्रा बहुतों की मधुर स्मृति है। वर्ष 2024 में ओखा और बेट द्वारका के बीच सुदर्शन सेतु नाम का दो किलोमीटर से अधिक लंबा केबल-आधारित पुल खोला गया, जिससे बुज़ुर्ग भक्तों के लिए और खराब मौसम में भी यात्रा बहुत सरल हो गई है। ओखा तक द्वारका से सड़क मार्ग से पहुँचा जाता है, इसलिए अधिकांश यात्री एक ही दिन में द्वारका, नागेश्वर और बेट द्वारका के दर्शन कर लेते हैं।
- District
- Devbhumi Dwarka