भगवद् गीता वर्ल्ड

योगेश्वर — सब योगों के स्वामी

"योगेश्वर" का अर्थ है योग के परम स्वामी। गीता के अंतिम श्लोक में संजय कहते हैं कि जहाँ योगेश्वर कृष्ण और धनुर्धारी अर्जुन हैं, वहीं श्री, विजय और नीति है।

"योग" और "ईश्वर" से बना योगेश्वर नाम बताता है कि श्रीकृष्ण सब योगों के स्वामी हैं। कर्मयोग, ज्ञानयोग, ध्यानयोग और भक्तियोग — गीता में बताए गए सभी मार्ग अंततः उन्हीं तक पहुँचते हैं। वे योग की सब सिद्धियों के स्वामी भी हैं और योग का अंतिम लक्ष्य भी।

भगवद्गीता में यह नाम अत्यंत महत्वपूर्ण स्थानों पर आता है। ग्यारहवें अध्याय के आरंभ में अर्जुन प्रार्थना करते हैं, "हे योगेश्वर, यदि आप मुझे योग्य समझें तो मुझे अपना अविनाशी रूप दिखाइए" (11.4)। तब संजय बताते हैं कि महायोगेश्वर हरि ने अर्जुन को अपना परम ऐश्वर्यमय विश्वरूप दिखाया। गीता के अंत में संजय कहते हैं कि उन्होंने यह परम गुह्य योग स्वयं योगेश्वर कृष्ण के मुख से सुना, और अंतिम श्लोक (18.78) में घोषणा करते हैं कि जहाँ योगेश्वर कृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धारी पार्थ हैं, वहीं श्री, विजय, ऐश्वर्य और अटल नीति है।

यह नाम विशेष रूप से उन साधकों को प्रिय है जो गीता के मार्ग पर चलते हैं। "योगेश्वर कृष्ण" के रूप में भगवान आदर्श गुरु हैं, जो संसार में रहते हुए भी सदा अनासक्त और समत्व में स्थित रहते हैं।

Name Sa
योगेश्वर
Name Roman
Yogeshwara
Meaning
योग के परम स्वामी
Gita Refs
11.4
Source
Bhagavad Gita 11.4 (Arjuna); 11.9, 18.75, 18.78 (Sanjaya)

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