श्याम और कान्हा — प्रेम के घरेलू नाम
"श्याम" भगवान के साँवले रूप का नाम है और "कान्हा" या "कन्हैया" कृष्ण का ब्रज का दुलार भरा रूप। ये नाम भगवान को अपना मानने वाले भक्तों के होंठों पर सबसे पहले आते हैं।
"श्याम" का अर्थ है साँवला, नीले-काले बादल जैसा। भक्त कवियों ने भगवान के इस वर्ण को वर्षा के मेघ, तमाल वृक्ष और नीलमणि से उपमा दी है। श्यामसुंदर, घनश्याम, श्याम सलोने — ये सब इसी रूप-माधुर्य के नाम हैं। ब्रज में श्याम के साथ राधा रानी को प्रेम से "श्यामा" भी कहा जाता है, और "श्यामा-श्याम" की जोड़ी की उपासना होती है।
"कान्हा", "कन्हैया" और "कान्ह" संस्कृत "कृष्ण" के ही ब्रजभाषा के बोलचाल वाले रूप हैं। गुजराती में यही "कानुडो", "कान" और "कानजी" बन जाते हैं। ये नाम किसी शास्त्रीय उपाधि की तरह नहीं, बल्कि माँ, सखा या प्रिय के दुलार की तरह बोले जाते हैं। माखन चुराने वाले, ग्वालबालों के साथ खेलने वाले और यशोदा मैया की गोद में मचलने वाले बालकृष्ण को सभी कान्हा कहकर ही पुकारते हैं।
सूरदास, रसखान और नरसिंह मेहता जैसे संत कवियों के पदों में ये नाम बार-बार आते हैं। जन्माष्टमी पर घर-घर में "नंद के आनंद भयो" के जयघोष के साथ कान्हा का स्वागत होता है।
- Name Sa
- श्याम / कान्ह
- Name Roman
- Shyam / Kanha
- Meaning
- साँवले सलोने; कृष्ण का दुलार भरा लोकरूप कान्हा