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रणछोड़ — प्रजा के हित में रण छोड़ने वाले

जरासंध और कालयवन के आक्रमण के समय प्रजा की रक्षा के लिए मथुरा का रणक्षेत्र छोड़ने से श्रीकृष्ण "रणछोड़" कहलाए। गुजरात के डाकोर में वे रणछोड़राय के रूप में पूजे जाते हैं।

"रण" का अर्थ है युद्ध और "छोड़" का अर्थ है छोड़ देना। सुनने में यह नाम अजीब लगता है कि सर्वशक्तिमान भगवान को रण छोड़ने वाला कहा जाए, पर इसी में उनकी करुणा और नीति छिपी है। भक्त इस नाम को बड़े गर्व और प्रेम से लेते हैं।

श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के अनुसार कंस-वध के बाद उसके ससुर जरासंध ने बार-बार विशाल सेना लेकर मथुरा पर आक्रमण किया, और हर बार पराजित हुआ। फिर एक ओर से कालयवन भी आक्रमण करने आया। मथुरा की प्रजा को बार-बार के युद्धों से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने समुद्र में द्वारका नगरी बसाई और सबको वहाँ पहुँचा दिया। फिर वे निःशस्त्र होकर कालयवन के सामने से भागे और उसे एक गुफा तक ले गए, जहाँ राजा मुचुकुंद सो रहे थे। कालयवन ने उन्हें कृष्ण समझकर लात मारी, और मुचुकुंद की दृष्टि पड़ते ही वह भस्म हो गया।

गुजरात में यह नाम विशेष रूप से प्रिय है। परंपरा के अनुसार डाकोर के भक्त बोडाणा प्रतिवर्ष पैदल द्वारका जाते थे, और उनकी वृद्धावस्था में भगवान स्वयं उनके साथ डाकोर आ गए। आज डाकोर में भगवान रणछोड़राय के रूप में विराजते हैं, और पूर्णिमा, विशेषकर शरद पूर्णिमा और फाल्गुन पूर्णिमा पर लाखों भक्त पैदल यात्रा कर दर्शन करने आते हैं।

Name Sa
रणछोड
Name Roman
Ranchhod
Meaning
प्रजा के हित में रणभूमि छोड़ने वाले
Source
Shrimad Bhagavatam, Canto 10 (Jarasandha, Kalayavana, Muchukunda); Dakor temple tradition

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