जगन्नाथ — सारे जगत के नाथ
"जगन्नाथ" का अर्थ है समस्त जगत के स्वामी। पुरी में भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के साथ जगन्नाथ रूप में पूजे जाते हैं और उनकी रथयात्रा विश्वप्रसिद्ध है।
"जगत्" और "नाथ" से बना जगन्नाथ नाम बताता है कि भगवान केवल किसी एक स्थान या समुदाय के नहीं, सारे संसार के स्वामी हैं। ओडिशा के पुरी धाम में श्रीकृष्ण इसी नाम से अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। पुरी चार धामों में से एक है।
परंपरा और पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न को भगवान ने स्वप्न में दर्शन देकर समुद्र में बहकर आने वाले एक दिव्य काष्ठ (दारु) से अपना विग्रह बनवाने को कहा। एक वृद्ध शिल्पी, जिन्हें स्वयं विश्वकर्मा माना जाता है, इस शर्त पर काम करने आए कि उनके कार्य पूरा होने तक कोई द्वार नहीं खोलेगा। कई दिनों तक भीतर से कोई आवाज़ न आने पर रानी की चिंता से द्वार समय से पहले खोल दिया गया, और विग्रह उसी अपूर्ण-से दिखने वाले रूप में रह गए, जिनकी बड़ी-बड़ी गोल आँखें आज भक्तों को मोह लेती हैं।
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को तीनों विग्रह विशाल रथों पर गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं। अहमदाबाद में भी आषाढ़ी बीज को भव्य रथयात्रा निकलती है। जगन्नाथ का महाप्रसाद सब जाति-वर्ग के लोग एक साथ ग्रहण करते हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष पुरी में जगन्नाथ के प्रेम में ही बिताए।
- Name Sa
- जगन्नाथ
- Name Roman
- Jagannath
- Meaning
- समस्त जगत के स्वामी
- Source
- Puri temple tradition; Skanda Purana (Purushottama Kshetra account)