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बाँके बिहारी — त्रिभंग मुद्रा में वृंदावन के विहारी

"बाँके बिहारी" का अर्थ है तीन स्थानों से बाँके (त्रिभंग) खड़े होकर लीला-विहार करने वाले प्रभु। वृंदावन का बाँके बिहारी मंदिर स्वामी हरिदास जी की भक्ति से प्रकट हुए विग्रह के लिए प्रसिद्ध है।

"बाँके" का अर्थ है टेढ़ा या बाँका, और "बिहारी" का अर्थ है विहार करने वाले, लीला का आनंद लेने वाले। श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध त्रिभंग मुद्रा में उनका शरीर गर्दन, कमर और घुटने — तीन स्थानों से सुंदर ढंग से मुड़ा होता है, और वे बाँसुरी लिए खड़े होते हैं। इसी मोहक रूप को बाँके बिहारी कहा जाता है।

परंपरा के अनुसार वृंदावन के निधिवन में महान संगीतज्ञ और रसिक संत स्वामी हरिदास जी अपने आराध्य की प्रेमपूर्वक उपासना करते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर श्यामा-श्याम ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी प्रार्थना पर एक ही विग्रह में प्रकट हुए। यही विग्रह आज बाँके बिहारी के नाम से पूजा जाता है। कहा जाता है कि संगीत सम्राट तानसेन भी स्वामी हरिदास जी के शिष्य थे।

बाँके बिहारी मंदिर की सेवा-परंपरा अनोखी है। यहाँ दर्शन के समय बीच-बीच में पर्दा डाला जाता है, क्योंकि भक्तों का भाव है कि ठाकुर जी की लगातार झाँकी देखने से कोई भक्त उनके प्रेम में सुध-बुध खो सकता है, या ठाकुर जी स्वयं भक्त के साथ चल पड़ेंगे। परंपरा के अनुसार यहाँ प्रतिदिन मंगला आरती नहीं होती, केवल जन्माष्टमी को होती है, और अक्षय तृतीया पर भगवान के चरणों के दर्शन होते हैं।

Name Sa
बाँके बिहारी
Name Roman
Banke Bihari
Meaning
त्रिभंग मुद्रा में लीला-विहार करने वाले प्रभु
Source
Vrindavan temple tradition (Swami Haridas, Nidhivan)

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