द्वारकाधीश — द्वारका के राजाधिराज
समुद्र के बीच बसाई गई स्वर्णिम द्वारका नगरी के स्वामी के रूप में श्रीकृष्ण "द्वारकाधीश" कहलाते हैं। गुजरात का द्वारकाधीश मंदिर चार धामों में से एक है।
"द्वारका" और "अधीश" अर्थात स्वामी — द्वारकाधीश वे हैं जो द्वारका के राजा हैं। ब्रज के ग्वाल कन्हैया जब यदुवंश के नायक बने, तब उनका यह राजसी रूप सामने आया। भक्तों के लिए यह नाम माधुर्य के साथ ऐश्वर्य का प्रतीक है।
श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के अनुसार जरासंध और कालयवन के आक्रमणों से प्रजा को सुरक्षित रखने के लिए श्रीकृष्ण ने समुद्र से भूमि माँगकर विश्वकर्मा द्वारा एक अद्भुत नगरी बनवाई। इसके महल, उद्यान और मार्ग अत्यंत सुंदर थे। यहीं रुक्मिणी जी और अन्य रानियों के साथ भगवान ने गृहस्थ जीवन बिताया, और यहीं उनके बचपन के सखा निर्धन सुदामा मुट्ठी भर चिउड़े लेकर आए, जिनका भगवान ने आँसुओं से स्वागत किया।
आज गुजरात के द्वारका में गोमती नदी के तट पर स्थित द्वारकाधीश मंदिर, जिसे जगत मंदिर भी कहते हैं, चार धामों में से एक है। इसके शिखर पर लहराती विशाल ध्वजा दिन में कई बार बदली जाती है, और भक्त ध्वजा चढ़ाने को बड़ा सौभाग्य मानते हैं। पास ही बेट द्वारका भी तीर्थ है। जन्माष्टमी पर यहाँ भव्य उत्सव होता है और "जय द्वारकाधीश" के जयघोष से पूरा नगर गूँज उठता है।
- Name Sa
- द्वारकाधीश
- Name Roman
- Dwarkadhish
- Meaning
- द्वारका के स्वामी और राजा
- Source
- Shrimad Bhagavatam, Canto 10 (founding of Dwarka, Sudama)