गिरिधारी — गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले
इन्द्र के कोप से ब्रज को बचाने के लिए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाए रखने वाले श्रीकृष्ण "गिरिधारी" या "गिरधर" कहलाते हैं। मीराबाई के आराध्य "गिरधर गोपाल" यही हैं।
"गिरि" का अर्थ है पर्वत और "धारी" का अर्थ है धारण करने वाला। गिरिधारी, गिरधर या गिरिराजधरण — ये सभी नाम उस लीला की याद दिलाते हैं जब बालकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया था।
श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के अनुसार ब्रजवासी हर वर्ष इन्द्र की पूजा करते थे। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि हमारी गौओं को चारा और जल देने वाला गोवर्धन पर्वत ही हमारा सच्चा आश्रय है, इसलिए उसकी पूजा करनी चाहिए। क्रुद्ध इन्द्र ने प्रलयकारी वर्षा भेजी। तब सात वर्ष के कन्हैया ने खेल-खेल में गोवर्धन को एक हाथ से, लोक-परंपरा के अनुसार बाएँ हाथ की छोटी उंगली पर, छाते की तरह उठा लिया और सात दिन-रात तक सभी ग्वालों, गोपियों और गौओं को उसके नीचे आश्रय दिया। अंत में इन्द्र ने हार मानकर क्षमा माँगी।
इसी लीला की स्मृति में दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है, जिसमें भगवान को अनेक व्यंजनों का भोग लगता है। राजस्थान की संत कवयित्री मीराबाई ने अपने आराध्य को "गिरधर गोपाल" कहकर जीवन भर पुकारा। नाथद्वारा के श्रीनाथजी भी इसी गिरिधारी स्वरूप के दर्शन कराते हैं।
- Name Sa
- गिरिधारी
- Name Roman
- Giridhari
- Meaning
- गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले
- Source
- Shrimad Bhagavatam, Canto 10 (Govardhan leela)