भगवद् गीता वर्ल्ड

मधुसूदन — मधु दैत्य का संहार करने वाले

सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु ने मधु और कैटभ नामक दैत्यों का वध किया, इसलिए वे "मधुसूदन" कहलाए। गीता में अर्जुन इस नाम से भगवान को कई बार पुकारते हैं।

"सूदन" का अर्थ है नाश करने वाला। मधुसूदन वे हैं जिन्होंने मधु नामक दैत्य का संहार किया। यह कथा पुराणों और महाभारत में आती है। प्रलय के बाद जब भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में थे और उनकी नाभि-कमल पर ब्रह्मा जी विराजमान थे, तब मधु और कैटभ नाम के दो बलवान दैत्य प्रकट हुए और ब्रह्मा जी को मारने तथा वेदों को छीनने दौड़े। ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर भगवान जागे, उनसे दीर्घ युद्ध किया और अंत में दोनों का वध कर सृष्टि की रक्षा की।

श्रीकृष्ण स्वयं विष्णु के पूर्ण अवतार हैं, इसलिए यह नाम उनके लिए भी प्रयुक्त होता है। भगवद्गीता में अर्जुन अनेक बार उन्हें मधुसूदन कहते हैं — पहले अध्याय में, दूसरे अध्याय में जब वे भीष्म और द्रोण से लड़ने में संकोच करते हैं, छठे अध्याय में मन की चंचलता की बात करते हुए, और आठवें अध्याय के प्रश्नों में।

भक्ति परंपरा में इस नाम का एक आंतरिक अर्थ भी बताया जाता है — भगवान हमारे भीतर के मोह, अहंकार और आसक्ति रूपी असुरों का भी नाश करते हैं। प्रसिद्ध अद्वैत आचार्य मधुसूदन सरस्वती ने गीता पर "गूढार्थ दीपिका" टीका लिखी और वे कृष्णभक्ति के लिए भी जाने जाते हैं।

Name Sa
मधुसूदन
Name Roman
Madhusudana
Meaning
मधु दैत्य का संहार करने वाले
Gita Refs
1.35, 2.4, 6.33, 8.2
Source
Mahabharata; Puranas (Madhu-Kaitabha episode)

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