माधव — लक्ष्मीपति और मधुवंश के गौरव
"माधव" का अर्थ है लक्ष्मी (मा) के पति, और मधु के वंश में जन्मे। यह नाम भगवान की माधुर्यपूर्ण और ऐश्वर्यपूर्ण दोनों छवियों को जोड़ता है।
"माधव" नाम की परंपरा में दो प्रमुख व्याख्याएँ हैं। पहली के अनुसार "मा" का अर्थ है लक्ष्मी और "धव" का अर्थ है पति, अतः माधव लक्ष्मीपति भगवान विष्णु हैं। दूसरी के अनुसार श्रीकृष्ण यदुवंश की उस शाखा में जन्मे जिसके पूर्वज राजा मधु थे, इसलिए वे मधुवंशी या माधव कहलाए। कुछ भक्त इसमें "मधु" यानी माधुर्य और वसंत का भाव भी देखते हैं।
भगवद्गीता के पहले अध्याय में अर्जुन कहते हैं, "हे माधव, अपने ही स्वजनों को मारकर हम कैसे सुखी होंगे?" संजय भी युद्ध के आरंभ में शंख बजाते हुए माधव और अर्जुन का वर्णन करते हैं। आचमन के समय लिए जाने वाले केशव, नारायण, माधव जैसे बारह नामों में भी यह नाम आता है।
माधव नाम से अनेक तीर्थ जुड़े हैं। काशी में बिंदु माधव और प्रयागराज में वेणी माधव प्रसिद्ध हैं। गुजरात के पोरबंदर के पास माधवपुर में परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी का विवाह हुआ था, जिसकी स्मृति में हर वर्ष चैत्र मास में मेला लगता है और वहाँ भगवान माधवराय के रूप में पूजे जाते हैं।
- Name Sa
- माधव
- Name Roman
- Madhava
- Meaning
- लक्ष्मीपति; मधुवंश में जन्मे
- Gita Refs
- 1.37