केशव — केशी का संहार करने वाले, सुंदर केशों वाले
"केशव" नाम की दो पारंपरिक व्याख्याएँ हैं — केशी असुर का वध करने वाले, और सुंदर घुंघराले केशों वाले। यह विष्णु के बारह प्रमुख नामों में पहला है।
"केशव" नाम के दोनों पारंपरिक अर्थ समान रूप से प्रचलित हैं। पहला अर्थ है "केश" यानी सुंदर, लंबे और घुंघराले बालों वाले। ब्रज के कवियों ने कृष्ण की काली लटों और उनमें सजे मोरपंख का बार-बार वर्णन किया है। दूसरा अर्थ केशी नामक असुर के वध से जुड़ा है।
श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के अनुसार कंस ने केशी नाम के एक विशाल और भयंकर अश्व-रूपी असुर को ब्रज भेजा। वह अपनी टापों से धरती को कंपाता और हिनहिनाता हुआ आया। श्रीकृष्ण ने निर्भय होकर उसका सामना किया, उसके खुले मुँह में अपना हाथ डाल दिया और हाथ को इतना बढ़ा दिया कि उसका श्वास रुक गया और वह गिर पड़ा। इसके बाद देवर्षि नारद ने आकर भगवान की स्तुति की।
केशव विष्णु के बारह प्रमुख नामों में पहला है। आचमन में "ॐ केशवाय नमः" से ही आरंभ होता है और वैष्णव तिलक लगाते समय भी ये बारह नाम लिए जाते हैं। गीता में अर्जुन कई बार भगवान को केशव कहते हैं, जैसे तीसरे अध्याय के आरंभ में पूछते हैं, "हे केशव, फिर आप मुझे इस घोर कर्म में क्यों लगा रहे हैं?"
- Name Sa
- केशव
- Name Roman
- Keshava
- Meaning
- केशी असुर के संहारक; सुंदर केशों वाले
- Gita Refs
- 1.31, 3.1, 10.14
- Source
- Shrimad Bhagavatam, Canto 10 (Keshi vadha)