दामोदर — जिनके उदर पर रस्सी बँधी
माता यशोदा ने नटखट कन्हैया को ऊखल से बाँधा, तभी से वे "दामोदर" कहलाए। यह नाम बताता है कि अनंत भगवान केवल प्रेम की डोर से बँधते हैं।
"दाम" का अर्थ है रस्सी और "उदर" का अर्थ है पेट। जिनके उदर पर रस्सी बाँधी गई, वे दामोदर हैं। यह नाम श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध में वर्णित एक अत्यंत मधुर लीला से आया है।
एक दिन माता यशोदा दही मथ रही थीं और बालकृष्ण को दूध पिला रही थीं। चूल्हे पर रखा दूध उफनने लगा, तो वे उन्हें छोड़कर उधर दौड़ीं। रूठे कन्हैया ने दही की मटकी फोड़ दी और छींके से मक्खन निकालकर बंदरों को खिलाने लगे। यशोदा जी ने उन्हें ऊखल से बाँधना चाहा, पर हर रस्सी दो अंगुल छोटी पड़ जाती। माँ को थकी और पसीने से भीगी देखकर भगवान ने स्वयं को बँधने दिया। फिर ऊखल को घसीटते हुए उन्होंने दो यमलार्जुन वृक्षों को गिरा दिया और उनमें शापवश बंधे कुबेर के पुत्र नलकूबर और मणिग्रीव को मुक्त किया।
कार्तिक मास को दामोदर मास कहा जाता है। इस महीने भक्त प्रतिदिन संध्या को दीप दान करते हैं और "दामोदराष्टकम्" का पाठ करते हैं। यह लीला सिखाती है कि जो भगवान पूरे ब्रह्मांड को धारण करते हैं, वे भी भक्त के निष्कपट प्रेम के आगे बँध जाते हैं।
- Name Sa
- दामोदर
- Name Roman
- Damodara
- Meaning
- जिनके उदर पर रस्सी बाँधी गई
- Source
- Shrimad Bhagavatam, Canto 10 (Damodara leela)