हरे कृष्ण कीर्तन
महामंत्र का सामूहिक संकीर्तन — श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा फैलाई गई नाम-संकीर्तन की परंपरा।
मूल पाठ
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
रचयिता: Kali-Santarana Upanishad; kirtan tradition of Shri Chaitanya Mahaprabhu
16वीं सदी में श्री चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल और ओडिशा में घर-घर, गली-गली हरिनाम का संकीर्तन फैलाया। आज भी मंदिरों, नगर-कीर्तनों और घरों में मृदंग, करताल और हारमोनियम के साथ यह महामंत्र गाया जाता है।
कीर्तन में एक व्यक्ति मंत्र की पंक्ति गाता है और सब लोग उसी धुन में दोहराते हैं। धीरे-धीरे लय तेज़ होती है और भक्त आनंद में नृत्य भी करते हैं। भाव यह है कि भगवान का नाम और भगवान अलग नहीं हैं, इसलिए नाम-कीर्तन में भगवान स्वयं उपस्थित होते हैं।
महामंत्र का अर्थ और जप की विधि "मंत्र" विभाग में दी गई है।
- Author
- Kali-Santarana Upanishad; kirtan tradition of Shri Chaitanya Mahaprabhu
- Note
- In the Kali-Santarana Upanishad the mantra is given with the Hare Rama line first; the Chaitanya tradition sings the Hare Krishna line first, as here.