भगवद् गीता वर्ल्ड

कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्

गीता-पाठ से पहले बोला जाने वाला प्रसिद्ध वंदना-श्लोक — मैं जगद्गुरु श्रीकृष्ण को प्रणाम करता हूँ।

मूल पाठ

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥

रचयिता: Traditional

यह श्लोक गीता-ध्यान और कृष्णाष्टकम् की परंपरा से जुड़ा है और गीता-पाठ, कथा या सत्संग के आरंभ में बोला जाता है।

अर्थ: वसुदेव के पुत्र, दिव्य स्वरूप, कंस और चाणूर का मर्दन करने वाले, देवकी को परम आनंद देने वाले, सारे जगत के गुरु श्रीकृष्ण की मैं वंदना करता हूँ।

"जगद्गुरु" शब्द याद दिलाता है कि श्रीकृष्ण केवल पूज्य देवता ही नहीं, बल्कि गीता के रूप में सारी मानवता के शिक्षक भी हैं। पाठ से पहले इसे बोलकर हम विनम्रता से उनसे मार्गदर्शन माँगते हैं।

Author
Traditional

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