भगवद् गीता वर्ल्ड

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी (धुन)

सरल पारंपरिक नाम-धुन, जिसे सत्संग और कीर्तन में सब मिलकर गाते हैं।

मूल पाठ

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥

रचयिता: Traditional

यह धुन केवल भगवान के नामों से बनी है, इसलिए इसे बच्चे-बूढ़े सभी सरलता से गा सकते हैं।

अर्थ: हे श्रीकृष्ण, गोविंद (गायों और इंद्रियों को आनंद देने वाले), हरि (दुःख हरने वाले), मुरारी (मुर दैत्य के शत्रु)! हे नाथ, नारायण, वासुदेव!

कीर्तन में एक व्यक्ति पंक्ति गाता है और सब उसे दोहराते हैं; धीरे-धीरे लय तेज़ होती जाती है। नाम-संकीर्तन को कलियुग में भक्ति का सबसे सरल साधन माना गया है।

Author
Traditional

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