हरे कृष्ण महामंत्र
सोलह नामों का महामंत्र, जिसे कलिसंतरण उपनिषद् कलियुग के दोष दूर करने वाला बताता है।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
hare kṛṣṇa hare kṛṣṇa kṛṣṇa kṛṣṇa hare hare hare rāma hare rāma rāma rāma hare hare
इस मंत्र में तीन नाम हैं — हरे (भगवान की आनंद-शक्ति, श्री राधा; अथवा "हे हरि"), कृष्ण (सबको आकर्षित करने वाले) और राम (आनंद देने वाले)। इसका भाव है: "हे भगवान, हे भगवान की शक्ति, मुझे अपनी सेवा में लगा लीजिए।"
कलिसंतरण उपनिषद् में यह मंत्र "हरे राम" से आरंभ होता है; श्री चैतन्य महाप्रभु की परंपरा और इस्कॉन में इसे प्रायः "हरे कृष्ण" से आरंभ करके गाया जाता है। दोनों रूपों में वही सोलह नाम हैं।
इसे माला पर धीरे-धीरे स्पष्ट उच्चारण के साथ जपा जा सकता है, या मृदंग-करताल के साथ सामूहिक कीर्तन में गाया जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष नियम या समय की बाध्यता नहीं मानी जाती — चलते-फिरते, काम करते हुए भी नाम लिया जा सकता है।
- Source
- Kali-Santarana Upanishad
- Japa Count
- 108