योगः कर्मसु कौशलम्
समबुद्धि से युक्त मनुष्य इसी जीवन में पुण्य और पाप दोनों से मुक्त हो जाता है। इसलिए योग में लग जाओ; कर्मों में कुशलता ही योग है।
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते ।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् ॥
buddhiyukto jahātīha ubhe sukṛtaduṣkṛte .
tasmādyogāya yujyasva yogaḥ karmasu kauśalam ॥
संबंधित गीता श्लोक: गीता 2.50
कुशलता का अर्थ केवल काम में निपुणता ही नहीं, बल्कि ऐसा कर्म करना है जो हमें बाँधे नहीं। शांत और स्पष्ट मन से किया गया कर्म ही सबसे कुशल होता है।
जीवन-सूत्र: हर काम ध्यान और प्रेम से करें; यही आपकी साधना बन जाएगा।
- Theme
- Karma Yoga
- Shloka Ref
- 2.50
- Shloka Path
- /chapter/2/50