भगवद् गीता वर्ल्ड

नियत कर्म करो

तुम अपना नियत कर्म करो, क्योंकि कर्म न करने से कर्म करना श्रेष्ठ है। कर्म न करने से तो तुम्हारी शरीर-यात्रा भी नहीं चल सकेगी।

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः ।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः ॥

niyataṃ kuru karma tvaṃ karma jyāyo hyakarmaṇaḥ .
śarīrayātrāpi ca te na prasiddhyedakarmaṇaḥ ॥

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गीता संसार से भागने की नहीं, संसार में रहकर सही ढंग से कर्म करने की शिक्षा देती है। आलस्य और टालमटोल मन को भारी बनाते हैं, जबकि कर्तव्य-पालन मन को निर्मल करता है।

जीवन-सूत्र: जो काम आपके हिस्से का है, उसे आज ही शुरू करें।

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Karma Yoga
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3.8
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/chapter/3/8

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