भगवद् गीता वर्ल्ड

शस्त्र आत्मा को काट नहीं सकते

आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती, जल भिगो नहीं सकता और वायु सुखा नहीं सकती।

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥

nainaṃ chindanti śastrāṇi nainaṃ dahati pāvakaḥ .
na cainaṃ kledayantyāpo na śoṣayati mārutaḥ ॥

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संसार की कोई भी शक्ति हमारे वास्तविक स्वरूप को नष्ट नहीं कर सकती। बाहरी परिस्थितियाँ शरीर और मन को प्रभावित करती हैं, पर भीतर का आत्मा सदा सुरक्षित है।

जीवन-सूत्र: कठिन समय में याद रखें कि आपका सच्चा स्वरूप अटूट है।

Theme
The eternal soul
Shloka Ref
2.23
Shloka Path
/chapter/2/23

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