सुख-दुःख आते-जाते हैं, उन्हें सहन करो
इंद्रियों और विषयों के संयोग से सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख होते हैं। वे आते-जाते हैं और अनित्य हैं, इसलिए हे भारत, उन्हें सहन करो।
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥
mātrāsparśāstu kaunteya śītoṣṇasukhaduḥkhadāḥ .
āgamāpāyino.anityāstāṃstitikṣasva bhārata ॥
संबंधित गीता श्लोक: गीता 2.14
जैसे ऋतुएँ बदलती हैं, वैसे ही जीवन में अच्छे और कठिन दिन आते-जाते हैं। सहनशीलता (तितिक्षा) का अर्थ हार मानना नहीं, बल्कि धैर्य से संतुलन बनाए रखना है।
जीवन-सूत्र: "यह समय भी बीत जाएगा" — इस भाव से धैर्य रखें।
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- Equanimity
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- 2.14
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