श्रेष्ठ जन जैसा करते हैं, लोग वैसा करते हैं
श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण करता है, दूसरे लोग भी वैसा ही करते हैं। वह जो प्रमाण स्थापित करता है, संसार उसी का अनुसरण करता है।
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः ।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥
yadyadācarati śreṣṭhastattadevetaro janaḥ .
sa yatpramāṇaṃ kurute lokastadanuvartate ॥
संबंधित गीता श्लोक: गीता 3.21
माता-पिता, शिक्षक और नेता अपने शब्दों से अधिक अपने आचरण से सिखाते हैं। इसलिए जिसके पास प्रभाव है, उसकी ज़िम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है।
जीवन-सूत्र: जो आप दूसरों में देखना चाहते हैं, पहले स्वयं वैसा बनें।
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- Leadership
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