भगवद् गीता वर्ल्ड

अपना धर्म श्रेष्ठ है

अच्छी तरह आचरण किए गए दूसरे के धर्म से गुणरहित होने पर भी अपना धर्म श्रेष्ठ है। अपने धर्म में मरना भी कल्याणकारी है, दूसरे का धर्म भय देने वाला है।

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥

śreyānsvadharmo viguṇaḥ paradharmātsvanuṣṭhitāt .
svadharme nidhanaṃ śreyaḥ paradharmo bhayāvahaḥ ॥

संबंधित गीता श्लोक: गीता 3.35

हर व्यक्ति का स्वभाव, क्षमता और ज़िम्मेदारी अलग होती है। दूसरों की नकल करने के बजाय अपनी भूमिका को ईमानदारी से निभाना ही सच्ची सफलता और शांति देता है।

जीवन-सूत्र: तुलना छोड़ें; अपने मार्ग पर निष्ठा से चलें।

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Svadharma
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3.35
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