जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र बदलता है
जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र उतारकर नए वस्त्र धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है।
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-
न्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥
vāsāṃsi jīrṇāni yathā vihāya navāni gṛhṇāti naro.aparāṇi .
tathā śarīrāṇi vihāya jīrṇāni anyāni saṃyāti navāni dehī ॥
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इस सरल उपमा से श्रीकृष्ण पुनर्जन्म का रहस्य समझाते हैं। वस्त्र बदलने से पहनने वाला नहीं बदलता। उसी तरह परिवर्तन शरीर का होता है, आत्मा का नहीं।
जीवन-सूत्र: परिवर्तन जीवन का नियम है; उससे डरें नहीं, उसे समझें।
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