भगवद् गीता वर्ल्ड

आत्मा न जन्मती है, न मरती है

आत्मा का न कभी जन्म होता है, न मृत्यु। वह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है; शरीर के मारे जाने पर भी वह नहीं मरती।

न जायते म्रियते वा कदाचिन्
नायं भूत्वा भविता वा न भूयः ।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
न हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥

na jāyate mriyate vā kadācin nāyaṃ bhūtvā bhavitā vā na bhūyaḥ .
ajo nityaḥ śāśvato.ayaṃ purāṇo na hanyate hanyamāne śarīre ॥

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शोक में डूबे अर्जुन को श्रीकृष्ण सबसे पहले यही समझाते हैं कि हम शरीर नहीं, अविनाशी आत्मा हैं। यह ज्ञान मृत्यु के भय को कम करता है और प्रियजनों के बिछुड़ने पर भी मन को सहारा देता है।

जीवन-सूत्र: स्वयं को केवल शरीर न मानें; आपके भीतर जो चेतना है, वह शाश्वत है।

Theme
The eternal soul
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2.20
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/chapter/2/20

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