भगवान को प्रिय भक्त
जो किसी प्राणी से द्वेष नहीं करता, सबका मित्र और दयालु है, ममता और अहंकार से रहित है, सुख-दुःख में सम और क्षमाशील है — वह भक्त मुझे प्रिय है (12.13–14)।
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च ।
निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥
adveṣṭā sarvabhūtānāṃ maitraḥ karuṇa eva ca .
nirmamo nirahaṅkāraḥ samaduḥkhasukhaḥ kṣamī ॥
संबंधित गीता श्लोक: गीता 12.13
भक्ति योग के अंत में श्रीकृष्ण प्रिय भक्त के गुण गिनाते हैं। भक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि मैत्री, करुणा, क्षमा और विनम्रता से भरा जीवन है।
जीवन-सूत्र: आज किसी एक व्यक्ति को सच्चे मन से क्षमा करें।
- Theme
- Bhakti
- Shloka Ref
- 12.13
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