भगवद् गीता वर्ल्ड

जीव मेरा ही सनातन अंश है

इस जीव-लोक में जीवात्मा मेरा ही सनातन अंश है, जो प्रकृति में स्थित मन और पाँच इंद्रियों को अपनी ओर खींचता है।

ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः ।
मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति ॥

mamaivāṃśo jīvaloke jīvabhūtaḥ sanātanaḥ .
manaḥṣaṣṭhānīndriyāṇi prakṛtisthāni karṣati ॥

संबंधित गीता श्लोक: गीता 15.7

हम सब भगवान के अंश हैं, जैसे सूर्य की किरणें सूर्य का अंश हैं। इसलिए हर जीव में दिव्यता है और हर जीव का भगवान से शाश्वत संबंध है।

जीवन-सूत्र: स्वयं को छोटा न समझें; आप उस अनंत के अंश हैं।

Theme
The eternal soul
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15.7
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