भगवद् गीता वर्ल्ड

सर्वधर्मान्परित्यज्य — मेरी शरण में आओ

सब धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो।

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥

sarvadharmānparityajya māmekaṃ śaraṇaṃ vraja .
ahaṃ tvāṃ sarvapāpebhyo mokṣyayiṣyāmi mā śucaḥ ॥

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गीता के उपदेश का यह चरम वचन है। सारे साधनों के बाद श्रीकृष्ण सबसे सरल मार्ग बताते हैं — पूर्ण शरणागति। जो भगवान पर पूरा भरोसा रखता है, उसे किसी बात का शोक नहीं रहता।

जीवन-सूत्र: अपने प्रयास पूरे करें, फिर पूरे विश्वास से स्वयं को भगवान को सौंप दें।

Theme
Surrender
Shloka Ref
18.66
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/chapter/18/66

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