भगवद् गीता वर्ल्ड

नरक के तीन द्वार — काम, क्रोध, लोभ

काम, क्रोध और लोभ — ये तीन आत्मा का नाश करने वाले नरक के द्वार हैं। इसलिए इन तीनों का त्याग कर देना चाहिए।

त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः ।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् ॥

trividhaṃ narakasyedaṃ dvāraṃ nāśanamātmanaḥ .
kāmaḥ krodhastathā lobhastasmādetattrayaṃ tyajet ॥

संबंधित गीता श्लोक: गीता 16.21

ये तीनों दोष एक-दूसरे से जुड़े हैं: अधूरी कामना क्रोध बनती है और पूरी हुई कामना लोभ बढ़ाती है। इन्हें पहचानकर संयम करने से जीवन में शांति आती है।

जीवन-सूत्र: संतोष को अपना धन बनाएँ।

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Self-discipline
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16.21
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