भगवद् गीता वर्ल्ड

हरिवंश और विष्णु पुराण

महाभारत का परिशिष्ट हरिवंश और विष्णु पुराण, भागवत के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के प्रमुख प्राचीन स्रोत हैं।

महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण का वर्णन मुख्यतः पांडवों के मित्र और मार्गदर्शक के रूप में है। उनके बचपन और व्रज की लीलाओं का विस्तृत वर्णन वहाँ नहीं मिलता। इस कमी को हरिवंश पूरा करता है, जिसे महाभारत का "खिल" अर्थात परिशिष्ट माना जाता है। परंपरा के अनुसार यह भी वैशंपायन द्वारा राजा जनमेजय को सुनाई गई कथा का भाग है।

हरिवंश के तीन भाग माने जाते हैं: हरिवंश पर्व, विष्णु पर्व और भविष्य पर्व। हरिवंश पर्व में सृष्टि और यदुवंश सहित राजवंशों का वर्णन है। विष्णु पर्व में श्रीकृष्ण के जन्म, गोकुल और वृंदावन की लीलाओं, कंस-वध, मथुरा से द्वारका जाने और द्वारका के जीवन का वर्णन है। भविष्य पर्व में आगे के समय और अन्य कथाओं का उल्लेख है। श्रीकृष्ण के जीवन का यह सबसे प्राचीन क्रमबद्ध वर्णनों में से एक माना जाता है।

विष्णु पुराण अठारह महापुराणों में एक प्रमुख पुराण है। इसमें महर्षि पराशर अपने शिष्य मैत्रेय को कथा सुनाते हैं। यह छह अंशों में विभाजित है, जिनमें सृष्टि, भगवान विष्णु की महिमा, ध्रुव और प्रह्लाद की कथाएँ, लोकों का वर्णन, राजवंश और कलियुग का वर्णन है। इसका पाँचवाँ अंश पूरी तरह भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को समर्पित है।

भागवत, हरिवंश और विष्णु पुराण की कथाओं में मूल घटनाएँ समान हैं, पर कहीं-कहीं विवरण और क्रम में अंतर मिलता है। भक्त इन सभी ग्रंथों को एक-दूसरे का पूरक मानते हैं, जो मिलकर श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्र का पूर्ण चित्र प्रस्तुत करते हैं।

Source
Harivamsha; Vishnu Purana, Amsha 5

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