भगवद् गीता वर्ल्ड

श्रीमद्भागवत के 12 स्कंध

श्रीमद्भागवत के बारह स्कंधों में सृष्टि से लेकर श्रीकृष्ण लीला और कलियुग तक की कथा क्रम से कही गई है।

श्रीमद्भागवत बारह स्कंधों में विभाजित है। भक्त परंपरा में इन्हें भगवान के श्रीविग्रह के अंगों के समान माना जाता है। यहाँ प्रत्येक स्कंध का संक्षिप्त परिचय दिया गया है।

पहले स्कंध में नैमिषारण्य के ऋषियों के प्रश्न, व्यासजी और नारदजी का संवाद, युद्ध के बाद पांडवों का जीवन और परीक्षित का जन्म व शाप वर्णित है। दूसरे स्कंध में शुकदेवजी कथा आरंभ करते हैं और भगवान के विराट रूप तथा सृष्टि का वर्णन करते हैं। तीसरे स्कंध में विदुरजी का उद्धवजी और मैत्रेय ऋषि से संवाद, वराह अवतार और भगवान कपिल का माता देवहूति को उपदेश है।

चौथे स्कंध में दक्ष यज्ञ और सती, बालक ध्रुव की तपस्या, राजा पृथु और प्रचेताओं की कथा है। पाँचवें स्कंध में प्रियव्रत, ऋषभदेव और जड़भरत के चरित्र तथा लोकों का भौगोलिक वर्णन है। छठे स्कंध में अजामिल की कथा, नारायण कवच और वृत्रासुर का प्रसंग है। सातवें स्कंध में भक्त प्रह्लाद और भगवान नृसिंह की कथा है।

आठवें स्कंध में गजेंद्र मोक्ष, मन्वंतरों का वर्णन, समुद्र मंथन, वामन अवतार और मत्स्य अवतार हैं। नौवें स्कंध में सूर्यवंश और चंद्रवंश, राजा अंबरीष और भगवान श्रीराम की कथा है। दसवाँ स्कंध भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर व्रज, मथुरा और द्वारका की लीलाओं का वर्णन करता है। ग्यारहवें स्कंध में यदुवंश का उपसंहार, उद्धव गीता और श्रीकृष्ण का स्वधाम गमन है। बारहवें स्कंध में कलियुग का वर्णन, परीक्षित की मुक्ति, मार्कंडेय ऋषि की कथा और पूरे ग्रंथ का सार है।

Source
Shrimad Bhagavatam

इसी श्रेणी में और – शास्त्र और ग्रंथ