श्रीमद्भागवत महापुराण: एक परिचय
महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत में 12 स्कंध और लगभग 18,000 श्लोक हैं; इसका दशम स्कंध भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण को पुराणों का मुकुटमणि कहा जाता है। परंपरा के अनुसार वेदों का विभाजन और महाभारत की रचना करने के बाद भी महर्षि वेदव्यास के मन में एक अपूर्णता बनी रही। तब देवर्षि नारद ने उन्हें भगवान के गुणों और लीलाओं का गान करने की प्रेरणा दी, और इसी से भागवत की रचना हुई। व्यासजी ने यह ग्रंथ अपने पुत्र, परम विरक्त शुकदेवजी को पढ़ाया।
भागवत की कथा एक विशेष परिस्थिति में कही गई। अर्जुन के पौत्र राजा परीक्षित को ऋषिपुत्र शृंगी ने शाप दिया था कि सात दिन में तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु होगी। राजा ने राज्य त्यागकर गंगा तट पर अनशन का व्रत लिया। वहाँ अनेक ऋषि एकत्र हुए और शुकदेवजी पधारे। राजा ने पूछा कि मृत्यु के निकट मनुष्य को क्या करना चाहिए, और उत्तर में शुकदेवजी ने सात दिनों तक उन्हें भागवत सुनाई। बाद में सूतजी ने नैमिषारण्य में शौनक आदि ऋषियों को यही कथा सुनाई।
भागवत में 12 स्कंध और लगभग 18,000 श्लोक हैं। इसमें सृष्टि, अवतार, भक्तों के चरित्र, राजवंश और धर्म का विस्तार से वर्णन है। इसका दशम स्कंध सबसे प्रिय माना जाता है, क्योंकि इसमें भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, गोकुल-वृंदावन की बाल-लीलाओं, रासलीला, मथुरा गमन, कंस-वध और द्वारका की लीलाओं का वर्णन है। एकादश स्कंध में उद्धवजी को दिया गया उपदेश है।
परीक्षित को सात दिन में कथा सुनाने की स्मृति में "भागवत सप्ताह" की परंपरा चली, जिसमें सात दिनों तक भागवत कथा का पाठ और प्रवचन होता है। भारत भर में और विदेशों में भी भक्त बड़ी श्रद्धा से सप्ताह कथा का आयोजन करते हैं। भागवत का केंद्रीय संदेश है कि भगवान के नाम, रूप, गुण और लीला में प्रेमपूर्ण भक्ति ही जीवन का परम लक्ष्य है।
- Source
- Shrimad Bhagavatam, Canto 1
- Skandhas
- 12
- Verses Approx
- 18000