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कार्तिक मास (दामोदर मास)

भगवान दामोदर को समर्पित पवित्र मास, जिसमें दीपदान, दामोदराष्टक का पाठ और अंत में तुलसी विवाह होता है।

कार्तिक मास को वैष्णव परंपरा में वर्ष का सबसे पवित्र महीना माना जाता है और इसे "दामोदर मास" भी कहते हैं। श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध में कथा है कि एक दिन बालक कृष्ण ने दही की मटकी फोड़ दी और माखन बंदरों को बाँटने लगे। माता यशोदा उन्हें दंड देने के लिए ऊखल से बाँधने लगीं, पर हर बार रस्सी दो उँगल छोटी पड़ जाती। अंत में माँ का परिश्रम और प्रेम देखकर भगवान स्वयं बँध गए। उदर पर रस्सी (दाम) से बँधे होने के कारण वे "दामोदर" कहलाए। ऊखल को खींचते हुए उन्होंने दो यमलार्जुन वृक्षों को गिरा दिया और उनमें शापवश बंद कुबेर-पुत्र नलकूबर और मणिग्रीव को मुक्त किया। यह लीला दिखाती है कि अनंत भगवान भी केवल प्रेम से बँधते हैं।

यह मास प्रायः अक्टूबर-नवंबर में पड़ता है। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में यह आश्विन पूर्णिमा के बाद आरंभ होकर कार्तिक पूर्णिमा पर पूर्ण होता है, जबकि गुजरात के अमांत पंचांग में कार्तिक मास दीपावली के अगले दिन से शुरू होता है। वैष्णव भक्त सामान्यतः शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक दामोदर व्रत रखते हैं।

इस पूरे मास में प्रतिदिन संध्या के समय भगवान के सामने घी का दीपक अर्पित किया जाता है, जिसे दीपदान कहते हैं। साथ में पद्म पुराण से जुड़ा "दामोदराष्टक" गाया जाता है, जिसमें माता यशोदा द्वारा बाँधे गए बाल कृष्ण की स्तुति है। भक्त प्रातःकाल नदी या सरोवर में स्नान करते हैं, तुलसी की सेवा करते हैं, जप-कीर्तन बढ़ाते हैं और कई लोग कुछ खाद्य पदार्थों का त्याग करते हैं। वृंदावन, मथुरा और जगन्नाथ पुरी में इस मास में विशेष भीड़ रहती है।

कार्तिक शुक्ल एकादशी को प्रबोधिनी या देवउठनी एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चातुर्मास की योगनिद्रा से जागते हैं और विवाह आदि शुभ कार्य फिर से आरंभ होते हैं। इसी समय, स्थानीय परंपरा के अनुसार एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक, तुलसी विवाह किया जाता है, जिसमें तुलसी जी का विवाह शालिग्राम या भगवान विष्णु के स्वरूप से पूरे विधि-विधान और मंगलगीतों के साथ होता है।

Tithi
कार्तिक मास; प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी कार्तिक शुक्ल एकादशी को
Month
October–November
Places
Vrindavan, Mathura, Puri, Dwarka, Dakor
Source
Shrimad Bhagavatam, Canto 10; Damodarashtakam (Padma Purana)

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