भगवद् गीता वर्ल्ड

गीता जयंती

वह पावन दिन जब कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।

गीता जयंती श्रीमद्भगवद्गीता के प्राकट्य का पर्व है। महाभारत के भीष्म पर्व के अनुसार, कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों की सेनाएँ आमने-सामने खड़ी थीं। अपने ही गुरुजनों, पितामह और स्वजनों को सामने देखकर अर्जुन शोक और मोह में डूब गए और उन्होंने धनुष रख दिया। तब उनके सारथी बने भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्तव्य, कर्मयोग, ज्ञान, ध्यान और भक्ति का दिव्य उपदेश दिया। अठारह अध्यायों और लगभग सात सौ श्लोकों वाला यह संवाद ही श्रीमद्भगवद्गीता है, जो आज भी पूरे विश्व में जीवन का मार्गदर्शक ग्रंथ माना जाता है।

परंपरा के अनुसार यह उपदेश मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को दिया गया था। इसी एकादशी को मोक्षदा एकादशी भी कहते हैं। अंग्रेज़ी कैलेंडर में यह प्रायः नवंबर के अंत या दिसंबर में आती है। गीता के दसवें अध्याय में भगवान स्वयं कहते हैं कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ, इसलिए यह मास और भी पवित्र माना जाता है।

इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, गीता का पूजन करते हैं और संपूर्ण गीता या उसके कुछ अध्यायों का पाठ करते हैं। मंदिरों, आश्रमों और विद्यालयों में गीता-पाठ, प्रवचन, श्लोक-पाठ प्रतियोगिताएँ और गीता की प्रतियाँ बाँटने के कार्यक्रम होते हैं। बहुत से परिवार इस दिन से प्रतिदिन गीता के कुछ श्लोक पढ़ने का संकल्प लेते हैं।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन होता है, जिसमें ब्रह्मसरोवर पर दीपदान, आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक गीता-पाठ होते हैं। ज्योतिसर, जिसे परंपरा में गीता-उपदेश का स्थान माना जाता है, इन दिनों विशेष श्रद्धा का केंद्र होता है। इस्कॉन और अनेक संस्थाएँ भी इस दिन विशेष गीता-यज्ञ और पाठ करती हैं।

Tithi
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा एकादशी)
Month
November–December
Places
Kurukshetra, Jyotisar
Source
Mahabharata, Bhishma Parva; Bhagavad Gita 10.35

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